इंतजार हुआ खत्म…उत्तराखंड विधानसभा में पेश हुआ UCC बिल, लगे “जय श्रीराम के नारे”

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देहरादून: उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता का विधेयक पेश कर दिया है। इस दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों ने सीएम धामी का अभिनंदन किया औऱ सदन में जय श्री राम के नारे लगाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड के नागरिकों को एक समान अधिकार देने के उद्देश्य से आज विधानसभा में समान नागरिक संहिता का विधेयक पेश किया। यह हम सभी प्रदेशवासियों के लिए गर्व का क्षण है कि हम UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाले देश के पहले राज्य के रूप में जाने जाएंगे।

इससे पहले धामी अपने निवास से अपने हाथ में संविधान की मूल प्रति लेकर गए थे। धामी ने कहा- “विधानसभा जाने से पूर्व देश के संविधान की मूल प्रति…” देश के संविधान निर्माताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 को सार्थकता प्रदान करने की दिशा में आज का दिन देवभूमि उत्तराखण्ड के लिए विशेष है। देश का संविधान हमें समानता और समरसता के लिए प्रेरित करता है और समान नागरिक संहिता कानून लागू करने की प्रतिबद्धता इस प्रेरणा को साकार करने के लिए एक सेतु का कार्य करेगी।

उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा- हमारा विरोध इसलिए है क्योंकि इस बिल पर चर्चा नहीं चाहती है, सीधा पास करना चाहती है लेकिन हम चाहते हैं कि इस पर चर्चा हो और उसके लिए उन्हें टाइम दिया जाए।

सूत्रों का कहना है कि मसौदे में 400 से अधिक धाराएं शामिल हैं, जिसका लक्ष्य पारंपरिक रीति-रिवाजों से उत्पन्न होने वाली विसंगतियों को खत्म करना है।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के बाद बहुविवाह पर रोक लग जाएगी और बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।

लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 21 साल तय की जा सकती है।

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए पुलिस में रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा।

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों को अपनी जानकारी देना अनिवार्य होगा और ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों को अपने माता-पिता को जानकारी प्रदान करनी होगी।

विवाह पंजीकरण नहीं कराने पर किसी भी सरकारी सुविधा से वंचित होना पड़ सकता है।

मुस्लिम महिलाओं को भी गोद लेने का अधिकार होगा और गोद लेने की प्रक्रिया सरल होगी।

पति और पत्नी दोनों को तलाक की प्रक्रियाओं तक समान पहुंच प्राप्त होगी।

नौकरीपेशा बेटे की मृत्यु की स्थिति में बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी पर होगी और उसे मुआवजा मिलेगा।

पति की मृत्यु की स्थिति में यदि पत्नी पुनर्विवाह करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा माता-पिता के साथ साझा किया जाएगा।

अनाथ बच्चों के लिए संरक्षकता की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।

पति-पत्नी के बीच विवाद के मामलों में बच्चों की कस्टडी उनके दादा-दादी को दी जा सकती है।

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